भारत में क्रिकेट एक धर्म की तरह है और इस खेल के प्रशंसकों ने क्रिकेटरों को भगवान का दर्जा दे दिया है। इतनी बड़ी आबादी वाले हमारे देश में कुछ बहुत ही चुनिंदा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन का मौका मिल पाता है। भारतीय क्रिकेट में ऐसे पिता-पुत्र की जोड़ियां बहुत कम ही रही हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी हो।
ऐसा हुआ है कि या तो पिता बहुत बड़े क्रिकेटर रहे हैं और बेटा उनके पदचिन्हों पर चलते हुए बहुत नाम नहीं कमा सका, या फिर ऐसा हुआ है कि बेटा अपने पिता से आगे निकलते हुए क्रिकेट का बहुत बड़ा खिलाड़ी बन गया। ऐसा बहुत कम ही हुआ है कि पिता और पुत्र दोनों ने ही भारतीय क्रिकेट में झण्डे गाड़े हों। आज हम आपको ऐसे ही 4 दिग्गज खिलाडियों के बारे में बताएंगे , जिनके बेटे ने क्रिकेट को करियर चुना लेकिन पिता के तरह वो सफलता हासिल नहीं कर पायें।
1. सुनील गावस्कर और रोहन गावस्कर

टेस्ट क्रिकेट में 10 हजार रन बनाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी सुनील गावस्कर (Sunil gavaskar) किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। इन्होने भारतीय टीम के लिए 125 टेस्ट मैच में हिस्सा लिया था। जबकि उसके अलावा उन्होंने 108 एकदिवसीय मैच में भी अपना शानदार प्रदर्शन दिखा चुके हैं। इतना ही नहीं उन्होंने भारतीय टीम का बतौर कप्तान नेतृत्व भी किया है। सुनील गावस्कर की गिनती महान बल्लेबाजों में से एक है।
उनके बेटे रोहन गावस्कर (Rohan gavaskar) अपने पिता के पदचिन्हो पर चलते हुए क्रिकेट को अपना करियर चुना था। इन्होंने इंडियन टीम के लिए 11 एकदिवसीय मैच ही खेला था। रोहन गावस्कर का करियर भारतीय टीम के लिए छोटा ही रहा था। फिर उन्होंने संन्यास का फैसला किया। रोहन गावस्कर ने फिर कमेंटेटर बनने का फैसला किया। जहा उन्हें अपने पिता की तरह ही सफलता मिला।
