भारतीय क्रिकेट (INDIAN CRICKET ) के सबसे चमकते सितारे जिससे प्रेरित होकर कई युवा भारतीयों ने क्रिकेट को अपना सपना बनाया है। अपने शानदार बल्लेबाजी से राहुल द्रविड़ ने भारतीय क्रिकेट को कई ऊंचाईयां दी है। राहुल द्रविड़ (RAHUL DRAVID) इस समय भारतीय सीनियर क्रिकेट टीम के हेड कोच के रूप में कार्य कर रहे है। द्रविड़ के क्रिकेट से जुड़े रिकॉर्ड के बारे में तो हम जानते ही हैं।
साथ ही साथ यह भी जानते हैं कि वो कितने दिलदार इंसान भी हैं। आज हम आपको राहुल के कुछ ऐसे किस्से बताने वाले हैं जिससे आप उन्हें दिलदार इंसान कहने से पीछे नहीं हटेंगे।
1. अपने बच्चे के स्कूल में लाइन लगाकर खड़े हो गए थे राहुल द्रविड़

भारत के पूर्व कप्तान और वर्तमान कोच राहुल द्रविड़ (RAHUL DRAVID) भारतीय क्रिकेट (INDIAN CRICKET) टीम में द वॉल (THE WALL) नाम से मशहूर हैं। राहुल बड़े ही सरल और उदार इंसान हैं। उन्हें अपनी जिंदगी में ज्यादा ताम झाम पंसद नहीं हैं। वो बहुत ही सरल तरीके से जीवन जीते हैं। और उनके सरल जीवन जीने के तरीके से पता चलता हैं कि उनका दिल कितना बड़ा हैं।
एक बार राहुल अपने बेटे के साइंस एक्जीबिशन में गए थे। वहां राहुल एक साधारण पिता की तरह ही पहुंचे थे और सभी पैरेंट्स की तरह लाइन में लगे थे। राहुल द्रविड़ का ऐसा करना फैंस के दिलों को छू गया क्योंकि उन्होने अपने स्टारडम का कोई फायदा नहीं उठाया और शांति से वही किया जो बाकी बच्चों के माता-पिता कर रहे थे।
2. लोगों के बीच आम व्यक्ति की तरह बैठ गए थे राहुल द्रविड़

भारत के पूर्व खिलाड़ी राहुल द्रविड़ एक बार एक किताब समारोह में बिना सिक्योरिटी के साथ पहुंचे थे। इस समारोह में राहुल ने मास्क लगाकर रखा था। इसीलिए वो किसी भी व्यक्ति के पहचान मे नहीं आए। इस समारोह में राहुल कुछ ही देर के लिए आए थे और साथ ही सभी लोगों के बीच जाकर बैठ गए थे। सभी लोगों की तरह राहुल भी लेखक राम गुहा का स्वागत करने उठे थे। तब वहां मौजूद लोंगो को पता चला की वह राहुल द्रविड़ हैं। यह समारोह गुंडप्पा विश्वनाथ की नई बुक से जुड़ा था। इसलिए राहुल भी इस समारोह में आमंत्रित थे।
राहुल द्रविड़ ने उपाधि लेने से कर दिया था मना

राहुल द्रविड़ (RAHUL DRAVID) भारतीय क्रिकेट (INDIAN CRICKET) में अपनी बल्लेबाजी के तकनाकों के लिए द वॉल के नाम से मशहूर हैं और नाम द वॉल उन्हें उनके क्रिकेट में शानदार कारनामों की वजह से ही मिला हैं। जब एक बार बैंगलोर यूनिवर्सिटी में उन्हें एक बार उपाधि देने की पेशकश की गई थी। लेकिन दिलदार व्यक्ति राहुल ने उस उपाधि को लेने से यह कहकर मना कर दिया था की इसके लिए उन्होने कुछ भी नहीं किया है इसलिए वो इसे नहीं ले सकते हैं।
राहुल का अपने क्रिकेट करियर को अन्य बाकी क्रिकेटरों की तरह रखना। उन्हें हर मायने में सब से अलग करता हैं। राहुल का अपने आप को एक सरल व्यक्ति के रूप में स्थापित करना। आज के युवाओं को बहुत प्रेरणा देने वाली बात हैं।
