KAILASH पर्वत पर जब चढ़ गया था 1 संत, उसने जो देखा वो अविश्वसनीय था, आप नहीं कर पायेंगे विश्वास

KAILASH पर्वत पर जब चढ़ गया था 1 संत, उसने जो देखा वो अविश्वसनीय था, आप नहीं कर पायेंगे विश्वास

कैलाश पर्वत (Kailash) के शिखर को आज तक कोई फ़तेह नहीं कर पाया है.  कैलाश पर्वत (Kailash) का रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया है और ना ही कोई चढ़ पाया है. कैलाश पर्वत (Kailash) की महिमा अप्रम पार है. कैलाश पर्वत पर एक ही संत चढ़ा था जिसने कुछ ऐसा देखा की आज तक कोई नहीं देख पाया.

कैलाश पर्वत पर किसको हुआ चढ़ने का सौभाग्य प्राप्त

KAILASH: कैलाश पर्वत पर चढ़ा था 1 संत, उसने जो देखा वो अविश्वसनीय था
KAILASH: कैलाश पर्वत पर चढ़ा था 1 संत, उसने जो देखा वो अविश्वसनीय था

अकाल मृत्यु वो मरे जो काम करे चांडाल का,
काल भी उसका क्या करे जो भक्त हो महाकाल का.

कैलाश (Kailash) पर्वत को स्वर्ग की सीढ़ी भी कहा जाता है. पर्वत श्रंखला में ये सबसे जटिल श्रंखला मानी जाती है. कैलाश (Kailash) चार मुख्या धर्मो का केंद्र है. हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख. ये पर्वत तिब्बत में स्थित है. यहाँ पर एक ऐसा नाम प्रसिद्ध है जो कैलाश पर्वत के शिखर पर पहुंचा था. आपको बतायंगे की कौन था वो जो इस पर्वत पर चढ़ा था और इसके साथ ही इस पर्वत से जुड़े रोचक तथ्य भी बतायंगे. ऐसी मान्यता है की भगवान शिव  कैलाश पर्वत पर वास करतें हैं.

6638 मीटर ऊँचा कैलाश (Kailash) पर्वत माउंट एवेस्र्ट (Mount Everest) से 22 किलोमीटर ही छोटा है. लेकिन माउंट एवेरस्ट पर अब तक सैकड़ो लोग चढ़ चुके हैं. कैलाश पर्वत (Kailash) पर्वत पर चढने वाले किसी व्यक्ति का नाम आपको कहीं नहीं मिलेगा. कैलाश पर्वत पर कहते है की एक सिद्ध और सच्चा इंसान ही चढ़ सकता है क्योंकि ये पर्वत अपनी महिमा कब और कैसे दिखता है ये किसी को पता नहीं होता है. इस पर्वत पर चढ़ने वाले संत का नाम जैसद मिलारेपा था.

मिलारेपा के पर्वत चढ़ने की घटना कितनी सही

KAILASH: कैलाश पर्वत पर चढ़ा था 1 संत, उसने जो देखा वो अविश्वसनीय था

आज तक कोई मनुष्य इस पवित्र कैलाश पर्वत पर नहीं चढ़ पाया. जिसने भी चढ़ने की कोशिश की, उसकी मृत्यु हो गई. इस बारे में बहुत-सी बातें प्रचलित हैं. इस पर्वत का काफी महत्त्व है. इस पर्वत को अजीत पर्वत कहा जाता है मतलब जिसे जीता न जा सके. लेकिन जब आप तिब्बत के इतिहास के पन्ने पलटेंगे तब आपको पता चलेगा की 1 हज़ार साल पहले तिब्बत के एक संत ने ऐसा करके दिखाया था. ऐसा कहा जाता है की जैसद मिलारेपा ने पर्वत की चढ़ाई शुरू की तब उनके साथ एक और अध्यात्मिक गुरु ने चढ़ाई शुरू की थी.

लेकिन कैलाश (Kailash) पर्वत पर ऊपर चढ़ने के बाद उस गुरु ने तीव्र और अजब गजब सूर्य की किरणों का सामना किया . मिलारेपा ने कैलाश पर्वत के शिखर को छुआ और वहां तप किया. उनकी कहानी से यही लगता है की परालौकिक ज्ञान वाले बहुत आराम से इस पर्वत की शिखर को छू सकतें हैं. कैलाश पर्वत इतना रहसयमयी है की आज तक इसके बारे में वैज्ञानिक तक नहीं पता लगा पाए हैं. इस अजूबी पर्वत का रहस्य आज भी एक रहस्य ही है.

 

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