बार बार ट्रेंनिंग सेंटर छोड़ कर भाग जाते थे हरभजन सिंह, दोस्त बस स्टैंड से पकड़ कर लाते थे उन्हें

भारतीय टीम के दिग्गज ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह (HARBHAJAN SINGH) को भला कौन भारतीय नही जनता है. इंडिया टीम के लिए कई साल खेलने वाले हरभजन ने हाल ही में सभी तरह के क्रिकेट को अलविदा कह दिया. हरभजन की गिनती दुनिया के सबसे अच्छे स्पिन गेंदबाजो में होती है.
हरभजन सिंह अपनी उस खास गेंदबाजी स्पेल के लिए जाने जाते है जब उन्होंने साल 2001 में टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक ली थी. इसके साथ ही साल 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली टीम इंडिया के भी वो हिस्सा रहे. उनके एक बेहतरीन खिलाड़ी बनने के पीछे कई अनसुने मज़ेदार किस्से भी है जो आपके साथ हम अपने इस लेख में साजा करेंगे.
एक वक्त ऐसा था जब घर से बाहर रहना मुश्किल था हरभजन सिंह के लिए

क्रिकेट मैचों में अपनी गेंदबाजी से विरुद्ध टीम के बल्लेबाजों को धराशाही कर देने वाले हरभजन सिंह के लिए एक वक्त ऐसा था जब उनका घर से बहार रहना काफी मुश्किल हो रहा था बता दें की जब भज्जी को पता चला कि उन्हें 3 साल की ट्रेंनिंग के लिए चंडीगढ़ में ठेरना पड़ेगा तो उन्होंने अपने घरवालो को वहां जाने से मना कर दिया था. क्योकिं वो इससे पहले कभी भी घर से बाहर नहीं गए थे. भज्जी ने इस बारे में अपने एक इंटरव्यू में कहा था की वो दो साल उनके लिए काफी मुश्किल थे और उनको वहां से जीवन के बारे में पता चला.
जब हरभजन के दोस्त उन्हें बस स्टैंड से पकड़ कर लाते थे

भारतीय दिग्गज स्पिन गेंदबाज़ हरभजन सिंह को जब पता चला कि तीन साल उनको घर से बाहर चंडीगढ़ हॉस्टल में रहना होगा तो उनके लिए ये बात बस से बाहर हो गई थी. क्योंकि वह इससे पहले कभी भी घर से बाहर अकेले नही रहे थे. जिसके चलते उन्होंने कई बार ट्रेनिंग सेंटर से भागने की कोशिश भी की थी लेकिन उनके दोस्त उन्हें बस स्टैंड से पकड़ कर दोबारा ट्रेनिंग सेंटर ले आते थे.
हालाकि इन मुसीबतों के बाद जब उनके करियर ने रफ्तार पकड़ी तो वो बतोर गेंदबाज़ तेजी से आगे बढ़ते चले गए. वहीं साल 2007 में जब भारत ने टी-20 विश्व कप जीता तो हरभजन सिंह टीम का हिस्सा थे और इसके साथ ही साल 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली टीम इंडिया के भी वो हिस्सा रहे. भज्जी आज भी अपनी बेहतरीन स्पिन गेंदबाजी के चलते भारतीय दिलो पर राज करते है.
मजे-मजे में दोस्तों के साथ ट्रयल्स देने पहुँच गये थे भज्जी

अपनी स्पिन गेंदबाजी के लिए जाने जाये वाले हरभजन सिंह ने बताया था कि पहली बार वो जालंधर में अपने दोस्तों के साथ पटियाला ट्रायल देने के लिए गए थे. लेकिन वो इस चीज को लेकर बिलकुल भी सीरियस नहीं थे. वो वहां बस दोस्तों के साथ मज़े मज़े में आ गए थे.
हरभजन सिंह ने इस किस्से का ज़िक्र जी टीवी के शो जीना इसी का नाम है पर किया था जिसमे उन्होंने कहा था की पहली बार जब हम ट्रायल्स देने गए हमने अखबार में पढ़ा था कि ऑल इंडिया ट्रायल्स हो रहे हैं तो हम मजे करने गए थे लेकिन जैसे जैसे ट्रायल्स चलता गया जलंधर के 30 में से दो लड़के सिलेक्ट हुए थे. मैं सिलेक्ट हुआ था. लेकिन बाकी वापस आ रहे थे तो मैंने कहा कि मैं क्या करूंगा मैं भी चलता हूं लेकिन एक दोस्त ने मुझे बोला तेरा नाम आया है तू रुक. मैंने फिर ट्रायल्स दी और मैं सिलेक्ट हो गया. हम निकले थे मस्ती करने लेकिन सीरियस वाली लाइन शुरू हो गई.
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