MANDIR & MASJID, राम मंदिर के बाद अब मथुरा और काशी में बढ़ा विवाद
MANDIR & MASJID, राम मंदिर के बाद अब मथुरा और काशी में बढ़ा विवाद

134 साल पुराने अयोध्या मंदिर-मस्जिद (MANDIR & MASJID) विवाद पर 9 नवंबर 2021  को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था. उसके पहले से ही हिन्दू समुदाय की ये माँग थी की उनको तीन जगह मंदिर के लिए पूरी तरह से स्थान मिल जाए. इन जगहों में अयोध्या, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और मथुरा शामिल हैं. 10 मई को  ज्ञानवापी मस्जिद की वीडियोग्राफी हुई थी.

विवाद की जड़ है क्या आखिर

MANDIR & MASJID: ये मंदिर है या मस्जिद? क्या होगा अंतिम फैसला?

मंदिर-मस्जिद (MANDIR & MASJID) विवाद देश में सदियों से चला आ रहा है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया था. इस फैसले के बाद से ही लोगों की उम्मीदे और बढ़ गयीं हैं. दरअसल, ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi) का मामला 15 वीं सदी से चलता आ रहा है. 15 वीं सदी में औरंगजेब (Aurangzeb) का शासन हुआ करता था. ऐसी मान्यता है की औरंगजेब (Aurangzeb) ने 1664 में यहाँ मंदिर (MANDIR) तोड़कर मस्जिद का निर्माण करवाया था.

कुछ जानकारों की माने तो यहाँ पर मस्जिद अकबर (Akbar) के ज़माने से है. 1585 में अकबर ने यहाँ पर मस्जिद का निर्माण करवाया था. हालाँकि दावा ये भी है की यहाँ पर ज्योतिर्लिंग भी है. इसके साथ ज्ञानवापी मस्जिद और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बीच में माता श्रृंगार देवी का मंदिर है. इस मंदिर की परिक्रमा पहले मस्जिद परिसर से की जाती थी लेकिन अब वहां पर सुरक्षा कारण बता के उसको भी बंद करवा दिया गया है.

हिन्दू पक्ष का बड़ा दावा, साक्ष्य भी हैं मौजूद

मथुरा (Mathura) में मंदिर-मस्जिद (MANDIR & MASJID) विवाद को लेकर जदुनाथ सरकार (Jadunath Sarkar) की किताब में एक टाइटल है “His destruction of Hindus” उसके अनुसार हिन्दुस्तान के तख़्त पर 12 साल बैठने के बाद औरंगजेब (Aurangzeb) ने 1669 में एक आदेश ज़ारी किया था. इस आदेश में लिखा था की काफिरों (मूर्तियों की पूजा करने वाले) के सारे मंदिर (MANDIR) ध्वस्त कर दिए जाए. इसके साथ ही उनके धार्मिक स्थानों पर भी आने की मनाही हो जाए.

एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह ने मथुरा मंदिर से जुड़े साक्ष्य 2021 में कोर्ट को सौपें थे. ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़ा माँ श्रृंगार गौरी के मंदिर में पूजा करने के लिए 18 अगस्त 2021 में 5 महिलाओं ने याचिका दायर की थी. अब भाजपा (BJP) से ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं की 2024 के लोकसभा में ये मुद्दा (BJP) के मैनिफेस्टो में शामिल हो सकता है.

 

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