Vaibhav Sooryavanshi
Vaibhav Sooryavanshi को लगातार बेंच पर बैठाने से भड़के कोच! गौतम गंभीर के मैनेजमेंट पर लगाया ‘तानाशाही’ का आरोप

भारतीय क्रिकेट के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इन दिनों अपने प्रदर्शन से ज्यादा टीम इंडिया की प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिलने को लेकर चर्चा में हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ जारी पांच मैचों की टी20 सीरीज के शुरुआती तीन मुकाबलों में वैभव को खेलने का मौका नहीं मिला। लगातार बेंच पर बैठने के बाद अब उनके बचपन के कोच मनीष ओझा ने टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गौतम गंभीर के नेतृत्व वाले मैनेजमेंट की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए इसे ‘तानाशाही’ तक करार दिया।

वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) जैसे युवा खिलाड़ी को लगातार प्लेइंग इलेवन से बाहर रखने पर उठे इन सवालों ने भारतीय टीम की चयन नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह है कि क्या युवा प्रतिभाओं को तैयार करने के लिए उन्हें लगातार मैच खेलने का मौका मिलना चाहिए या टीम मैनेजमेंट को अनुभव और मौजूदा संयोजन को प्राथमिकता देने का अधिकार है?

Vaibhav Sooryavanshi को मौका नहीं मिलने पर क्यों भड़के कोच?

वैभव के बचपन के कोच मनीष ओझा ने टीम मैनेजमेंट की आलोचना करते हुए कहा कि युवा खिलाड़ियों को बेंच पर बैठाकर तैयार नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ी को बड़े मुकाबलों में खेलने और दबाव का सामना करने का अवसर देना जरूरी है।

ओझा ने स्पोर्ट्स नाउ से बातचीत में कहा कि वैभव एक तूफान की तरह हैं और उन्हें रोकने की कोशिश करने वालों को अंततः मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा टीम मैनेजमेंट का नजरिया ऐसा दिखाई देता है, जैसे खिलाड़ियों को बेंच पर बैठाकर तैयार किया जा सकता है।

कोच के मुताबिक, युवा खिलाड़ियों को वास्तविक मैच परिस्थितियों में उतारना जरूरी है। केवल अभ्यास या ड्रेसिंग रूम में बैठने से किसी खिलाड़ी की क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल नहीं हो सकता।

गौतम गंभीर के मैनेजमेंट पर लगाया ‘तानाशाही’ का आरोप

वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) को लगातार बाहर रखे जाने से नाराज मनीष ओझा ने टीम मैनेजमेंट के फैसलों को मनमाना बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था में फैसले इस तरह लिए जा रहे हैं, मानो मैनेजमेंट जो चाहे, वही हो।

ओझा ने कहा कि अगर किसी खिलाड़ी को मौका ही नहीं दिया जाएगा, तो वह अपनी प्रतिभा साबित कैसे करेगा? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब वैभव जैसा प्रतिभाशाली खिलाड़ी टीम के साथ मौजूद है, तो उसे लगातार बाहर बैठाकर रखने का क्या फायदा है।

हालांकि, ‘तानाशाही’ शब्द कोच की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है। भारतीय टीम मैनेजमेंट की ओर से इस आलोचना पर कोई आधिकारिक जवाब सामने आने की पुष्टि नहीं है। इसलिए इसे चयन प्रक्रिया पर उठे एक पक्ष के सवाल के रूप में देखना चाहिए, न कि किसी स्थापित तथ्य के रूप में।

आखिर क्यों प्लेइंग इलेवन से बाहर हैं Vaibhav Sooryavanshi

वेस्टइंडीज के खिलाफ टी20 सीरीज में भारतीय टीम ने ओपनिंग की जिम्मेदारी अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को दी है। शुरुआती तीन मुकाबलों में टीम मैनेजमेंट ने इसी संयोजन को बरकरार रखा, जिसके चलते वैभव को मौका नहीं मिल पाया।

वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) इससे पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी से ध्यान खींच चुके हैं। उनकी आक्रामक शैली और कम उम्र में बड़े शॉट खेलने की क्षमता ने उन्हें भारतीय क्रिकेट की चर्चित युवा प्रतिभाओं में शामिल कर दिया है।

हालांकि, किसी खिलाड़ी की प्रतिभा के बावजूद अंतिम एकादश में जगह मिलना टीम की रणनीति, विरोधी टीम के खिलाफ योजना और उपलब्ध खिलाड़ियों के संयोजन पर निर्भर करता है। टीम मैनेजमेंट को यह तय करना होता है कि किस मुकाबले में किस खिलाड़ी को उतारना सबसे उपयुक्त रहेगा।

संजू सैमसन और वैभव के बीच क्यों बनी प्रतिस्पर्धा?

भारतीय टीम में ओपनिंग स्लॉट को लेकर संजू सैमसन, अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) के बीच प्रतिस्पर्धा चर्चा में रही है। एशियन गेम्स के दौरान वैभव को ओपनिंग का मौका मिला था, जबकि वेस्टइंडीज सीरीज में संजू को फिर से शीर्ष क्रम में जगह दी गई।

इस बदलाव के बाद वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) के समर्थकों के बीच सवाल उठे कि जब युवा बल्लेबाज को मौका दिया गया था, तो उसे लगातार खेलने का अवसर क्यों नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर, संजू के अनुभव और टीम में उनकी भूमिका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

किसी एक खिलाड़ी को मौका देने का अर्थ दूसरे खिलाड़ी की प्रतिभा पर सवाल उठाना नहीं होता। असली चुनौती यह है कि टीम मैनेजमेंट खिलाड़ियों को उनकी भूमिका स्पष्ट करे और उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के पर्याप्त अवसर दे।

क्या Vaibhav Sooryavanshi को जल्द मिलेगा मौका?

अब सभी की नजर इस बात पर है कि वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज के बाकी मुकाबलों में वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में जगह मिलती है या नहीं। उनके कोच की तीखी प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को और चर्चा में ला दिया है।

वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) के लिए यह समय धैर्य बनाए रखने और अपनी तैयारी जारी रखने का है। वहीं, टीम मैनेजमेंट के सामने भी युवा प्रतिभा और मौजूदा टीम संयोजन के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

फिलहाल मनीष ओझा के बयान ने चयन नीति पर बहस जरूर तेज कर दी है। लेकिन वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Sooryavanshi) को आगे मौका कब मिलेगा, इसका फैसला टीम मैनेजमेंट ही करेगा। अब देखना होगा कि आने वाले मुकाबलों में भारतीय टीम अपनी रणनीति में बदलाव करती है या मौजूदा ओपनिंग संयोजन पर ही भरोसा बनाए रखती है।