अनिल कुंबले और विराट कोहली के बीच विवाद की असली वजह अब आ गई सामने

नॉट जस्ट ए नाइटवाचमैन: माइ इनिंग्स विद बीसीसीआई किताब में प्रशासक समिति (COA) के प्रमुख विनोद राय  (VINOD RAY) ने लिखा है कि अनिल कुंबले (ANIL KUMBLE) कोच पद से हटाए जाने के बाद काफी निराश थे। उनको लगता था कि उनके साथ अनुचित व्यवहार किया गया। उनके कार्यकाल की उपलब्धियों को न देखते हुए उनके ऊपर टीम को तरजीह दिया गया।

विनोद राय ने अपनी पुस्तक में किया है अनिल कुंबले और विराट कोहली प्रकरण का जिक्र

अनिल कुंबले और विराट कोहली के बीच विवाद की असली वजह अब आ गई सामने

विनोद राय ने अपनी किताब में लिखा कप्तान और टीम प्रबंधन के साथ मेरी बातचीत में यह पता चला कि कुंबले (ANIL KUMBLE) काफी अधिक अनुशासन लागू करते हैं और इसलिए टीम के सदस्य उनसे काफी अधिक खुश नहीं थे। ‘मैंने इस मुद्दे पर विराट कोहली (VIRAT KOHLI) के साथ बात की और उन्होंने कहा कि टीम के युवा सदस्य उनके साथ काम करने के उनके तरीके से डरते थे।

विनोद राय ने खुलासा किया कि सचिन तेंदुलकर (SACHIN TENDULKAR), सौरव गांगुली (SAVRABH GANGULI)और वीवीएस लक्ष्मण (VVS LAKSHMAN) की क्रिकेट सलाहकार समिति (सीएसी) ने कुंबले का अनुबंध बढ़ाने की सिफारिश की थी। इसके बाद लंदन में सीएसी की बैठक हुई और इस मुद्दे को सलुझाने के लिए दोनों के साथ अलग-अलग बात की गई। तीन दिन तक बातचीत के बाद उन्होंने मुख्य कोच के रूप में अनिल कुंबले (ANIL KUMBLE) की पुन: नियुक्ति की सिफारिश करने का फैसला किया लेकिन बाद में कुंबले को हटा कर रविशास्त्री को कोच नियुक्त कर दिया गया।

विराट कोहली-अनिल कुंबले प्रकरण में दोनों ने साधी थी चुप्पी

अनिल कुंबले और विराट कोहली के बीच विवाद की असली वजह अब आ गई सामने

विनोद राय ने लिखा है कि अनिल कुंबले (ANIL KUMBLE)के ब्रिटेन से लौटने के बाद हमने उनके साथ लंबी बातचीत की। कुंबले ने माना था कि कोच का कर्तव्य था कि वह टीम में अनुशासन और पेशेवरपन लाए और एक वरिष्ठ के रूप में, खिलाड़ियों को उनके विचारों का सम्मान करना चाहिए थाा। राय ने यह भी लिखा कि कुंबले ने महसूस किया कि प्रोटोकॉल और प्रक्रिया का पालन करने पर अधिक भरोसा किया गया और उनके मार्गदर्शन में टीम ने कैसा प्रदर्शन किया, इसे कम महत्व दिया गया।

उन्होंने लिखा कि कप्तान विराट कोहली (VIRAT KOHLI) के लिए सम्मानजनक चुप्पी बनाए रखना वास्तव में बहुत ही विवेकपूर्ण है। उनके किसी भी बयान से विचारों का अंबार लग जाता। अनिल कुंबले (ANIL KUMBLE) ने भी अपनी तरफ से चीजों को अपने तक रखा और किसी भी मुद्दे पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी। यह ऐसी स्थिति से निपटने का सबसे परिपक्व और सम्मानजनक तरीका था जो इसमें शामिल सभी पक्षों के लिए अप्रिय हो सकता था।

 

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